PSLV-C62 मिशन में बड़ा झटका: तीसरे चरण की गड़बड़ी से कक्षा में नहीं पहुंचे 16 उपग्रह

PSLV-C62 मिशन को एक बड़ा झटका लगा है। तीसरे चरण में आई तकनीकी खराबी के कारण लॉन्च किए गए 16 उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाए। यह घटना भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चिंता का विषय बन गई है।
नई दिल्ली (CGVARTA)। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को वर्ष 2026 की शुरुआत में एक बड़ा झटका लगा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का बहुप्रतीक्षित PSLV-C62 मिशन तकनीकी गड़बड़ी के कारण अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। रॉकेट ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी, लेकिन तीसरे चरण (PS3) के अंत में आई तकनीकी असामान्यता के कारण वह निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाया, जिससे DRDO के EOS-N1 सहित सभी 16 उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित नहीं हो सके।
यह मिशन 12 जनवरी को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था और इसे 2026 का पहला ऑर्बिटल मिशन माना जा रहा था।
क्या हुआ लॉन्च के दौरान?
- PSLV-C62 की उड़ान शुरुआती चरणों में पूरी तरह सामान्य रही।
- पहला और दूसरा चरण सफल।
- लेकिन तीसरे चरण के अंतिम हिस्से में रॉकेट के फ्लाइट पाथ में विचलन देखा गया।
ISRO के अनुसार, इसी विचलन के कारण रॉकेट ने अपनी निर्धारित कक्षा (Orbit) खो दी और सैटेलाइट्स को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।
कौन-कौन से उपग्रह प्रभावित हुए?
इस मिशन में कुल 16 उपग्रह शामिल थे, जिनमें प्रमुख थे:
- EOS-N1 (अन्वेषा) – DRDO का उन्नत निगरानी उपग्रह
- भारतीय स्टार्ट-अप्स और शैक्षणिक संस्थानों के तकनीकी उपग्रह
- नवाचार और शोध आधारित payloads
इन उपग्रहों का उपयोग रक्षा, अनुसंधान, शिक्षा और नई अंतरिक्ष तकनीकों के परीक्षण के लिए किया जाना था।
PSLV की विश्वसनीयता पर सवाल
PSLV को ISRO का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता रहा है। दशकों में इसने भारत और दुनिया के कई देशों के सैकड़ों उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च किए हैं।
लेकिन:
- PSLV-C61 मिशन में भी तीसरे चरण में समस्या
- और अब PSLV-C62 की विफलता
इन दो घटनाओं ने PSLV की तकनीकी विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ISRO की अगली रणनीति
ISRO ने Failure Analysis Committee गठित कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि:
- क्या तीसरे चरण के इंजन में दबाव असंतुलन था?
- क्या फ्लाइट कंप्यूटर या मार्गदर्शन प्रणाली में गड़बड़ी हुई?
- या कोई अन्य तकनीकी कारण जिम्मेदार रहा?
- जांच पूरी होने के बाद ISRO अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सुधारात्मक कदम सार्वजनिक करेगा।
PSLV-C62 मिशन
- रॉकेट: PSLV-C62
- लॉन्च तिथि: 12 जनवरी 2026
- स्थान: श्रीहरिकोटा
- उपग्रह: 16
- परिणाम: कक्षा में स्थापित नहीं हो सके
- कारण: तीसरे चरण में तकनीकी anomaly
- स्थिति: जांच जारी
यह मिशन महत्वपूर्ण क्यों?
- PSLV-C62 सिर्फ एक लॉन्च नहीं था, बल्कि:
- भारत के स्पेस स्टार्ट-अप इकोसिस्टम से जुड़ा मिशन
- रक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा
- 2026 के आगामी अंतरिक्ष अभियानों की नींव
- इसकी विफलता ने यह स्पष्ट किया है कि अंतरिक्ष विज्ञान में हर सफलता के पीछे कठोर परीक्षण और निरंतर सुधार अनिवार्य है।

Niraj Tiwari
Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.
