web-logo
  • छत्तीसगढ़

    |

    राष्ट्रीय |
    देश – विदेश |
    खेल |
    मनोरंजन |
    धर्म – संस्कृति |
    लाइफस्टाइल |
  • Stories
  • E-papers
      • राष्ट्रीय

        मद्रास उच्च न्यायालय ने डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी को 35 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में अग्रिम जमानत दी

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Jul 8, 2026, 5:59 PM
        मद्रास उच्च न्यायालय ने डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी को 35 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में अग्रिम जमानत दी
        Share :

        मद्रास उच्च न्यायालय ने डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी और उनके भाई को 35 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में अग्रिम जमानत दी है। यह मामला एक बड़े रिश्वत कांड से जुड़ा हुआ है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को जांच अधिकारी के सामने रोजाना पेश होने का निर्देश दिया है।

        14px16px18px20px22px24px
        Speed:

        मद्रास उच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण फैसले में, डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी और उनके भाई को 35 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में अग्रिम जमानत दी गई है। यह मामला एक बड़े रिश्वत कांड से जुड़ा हुआ है, जिसमें कई उच्च अधिकारी और नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।

        न्यायालय ने अपने फैसले में दोनों आरोपियों को जांच अधिकारी के सामने रोजाना पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही, न्यायालय ने यह भी कहा है कि आरोपियों के खिलाफ मामले की जांच के दौरान कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज या साक्ष्य नहीं मिले हैं।

        सेंथिल बालाजी के वकील ने न्यायालय में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का एक हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच अधिकारी ने अब तक कोई ठोस सबूत नहीं पेश किए हैं और यह मामला सिर्फ कॉल डिटेल रिकॉर्ड पर आधारित है।

        न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि सेंथिल बालाजी की भूमिका इस मामले में स्पष्ट नहीं है और उन्हें अग्रिम जमानत दी जा सकती है। साथ ही, न्यायालय ने यह भी कहा है कि जांच अधिकारी को मामले की जांच करनी चाहिए और अगर जरूरत हो तो आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए।

        यह मामला तamil Nadu की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है और विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह मामला सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों की विफलता को दर्शाता है।

        निष्कर्ष यह है कि मद्रास उच्च न्यायालय का यह फैसला एक महत्वपूर्ण मोड़ है और यह मामला आगे क्या रुख लेता है, यह देखना दिलचस्प होगा। साथ ही, यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

        Niraj Tiwari
        author

        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

        nextArticle