दिवाली पर करें ये 8 काम, मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न, घर में बरसेगा धन और सौभाग्य

दिवाली के दिन कुछ विशेष उपाय और परंपराएं अपनाने से न केवल घर में रोशनी बढ़ती है बल्कि मां लक्ष्मी का वास भी स्थायी हो जाता है। जानिए कौन से कार्य शुभ माने गए हैं।
दिवाली का पर्व रोशनी, उल्लास और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी स्वयं पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और उन्हीं घरों में प्रवेश करती हैं जहाँ स्वच्छता, श्रद्धा और भक्ति का संगम होता है।
अगर आप चाहते हैं कि इस दिवाली आपके घर में अखंड लक्ष्मी का वास हो, तो इन 8 विशेष कार्यों को अवश्य करें —
1. तिल और वनौषधियों से स्नान करें
दिवाली की सुबह तेल लगाकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन गंगा सभी जलों में और लक्ष्मी सभी तैल में निवास करती हैं। इसलिए पीपल, आम, गूलर या बरगद की छाल को पानी में उबालकर उससे स्नान करने से पाप नाश और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
2. दीप जलाएं लेकिन विधि से
शाम के समय प्रदोषकाल में सबसे पहले घर के मंदिर में दीपक जलाएं, फिर मुख्य द्वार, आंगन और बालकनी को रोशनी से भर दें। घर के ईशान कोण में दीपक रखना अत्यंत शुभ माना गया है — इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और लक्ष्मी जी का आगमन होता है।
3. कन्याओं और परिवारजनों का सम्मान करें
कन्याओं में देवी लक्ष्मी का वास माना गया है। दिवाली पर उन्हें फल, मिठाई या वस्त्र देकर आशीर्वाद लेना शुभ होता है। साथ ही घर के सभी सदस्यों को तिलक लगाना और पान का पत्ता देना आपसी प्रेम और सौभाग्य को बढ़ाता है।
4. बहीखाता पूजन करें
दिवाली व्यापारियों के लिए भी खास दिन है। इस दिन पुराने खातों को बंद कर नए बहीखातों की शुरुआत की जाती है। “श्री” लिखकर मां लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा करने से व्यापार में वृद्धि और धन स्थायित्व आता है।
5. लक्ष्मी-गणेश-कुबेर पूजन करें
दिवाली की शाम लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और कुबेर देव की आराधना करने से धन, बुद्धि और वैभव का आशीर्वाद मिलता है।
6. मुख्य द्वार को सजाएं
घर के प्रवेश द्वार को स्वच्छ और सजावटी बनाएं। दरवाजे पर स्वस्तिक, ओम और लक्ष्मी पग बनाना अत्यंत शुभ माना गया है। फूलों की बंदनवार और रंगोली से दरवाजा सजाना सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है।
7. मंदिर और नदी किनारे दीपदान करें
प्रदोष काल में किसी मंदिर या पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से पितरों और देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। इसे पितृ तर्पण का एक प्रतीकात्मक रूप भी माना जाता है।
8. पार्वण श्राद्ध का महत्व
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि दिवाली के दिन पितरों के लिए भोजन और ब्राह्मण भोज कराने से परिवार में शांति और सौभाग्य बना रहता है।
दिवाली केवल बाहरी रोशनी का नहीं, बल्कि आत्मा के प्रकाश का पर्व है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए धन से ज्यादा जरूरी है स्वच्छता, श्रद्धा और सच्ची भक्ति।
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है।
cgvarta.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Niraj Tiwari
Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.
