धमतरी का अनोखा दशहरा: यहां रावण नहीं, अहिरावण का वध होता है, जानिए रहस्य

सिहावा में दशहरा परंपरा: मां शीतला के खड्ग से मिट्टी के अहिरावण का वध, हजारों लोग बने साक्षी
धमतरी। भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक अनोखा उदाहरण धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र में दशहरे के अवसर पर देखने को मिलता है। जहां देशभर में रावण दहन की परंपरा है, वहीं यहां अहिरावण का वध किया जाता है। खास बात यह है कि यह वध मां शीतला देवी के खड्ग से किया जाता है और इसमें इस्तेमाल होने वाला पुतला गांव-गांव से एकत्र की गई मिट्टी से बनाया जाता है।
धमतरी से लगभग 70 किमी दूर सोनामार गांव में यह आयोजन विजया दशमी के अगले दिन एकादशी को होता है। हजारों लोग यहां जुटकर न केवल मां शीतला का आशीर्वाद लेते हैं, बल्कि पुतले की मिट्टी घर ले जाकर सुख-शांति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की मान्यता भी मानते हैं।
पुलिस द्वारा चांदमारी की रस्म निभाई जाती है और फिर मुख्य बैगा (आदिवासी पुजारी) मां के खड्ग से अहिरावण के पुतले का वध करता है। परंपरा के अनुसार, इस आयोजन में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता।
कहा जाता है कि यह परंपरा उस समय से चली आ रही है जब वासना से ग्रसित असुर अहिरावण का वध माता चण्डिका ने किया था। सिहावा का यह दशहरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आदिवासी संस्कृति और लोक परंपरा की गहराई को भी उजागर करता है। आज सोशल मीडिया के कारण इसकी ख्याति दूर-दूर तक फैल चुकी है और हर साल श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है।

Niraj Tiwari
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