भारत-ब्रिटेन की मुलाकात में उठा खालिस्तान का मुद्दा, मोदी ने स्टार्मर को सुनाई सख्त चेतावनी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मुलाकात में व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग को लेकर अहम चर्चा की। इस दौरान ब्रिटिश धरती पर खालिस्तानी चरमपंथियों की गतिविधियों पर भी भारत ने कड़ा रुख अपनाया।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टार्मर ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और तकनीकी साझेदारी को और मज़बूत करने पर गहन चर्चा की। इसके साथ ही, ब्रिटेन में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी समूहों की गतिविधियों पर भी भारत ने सख्त आपत्ति जताई।
भारत सरकार ने पहले से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि इन वार्ताओं में खालिस्तानी उग्रवाद का मुद्दा प्रमुख रहेगा। हाल ही में लंदन में हुई कुछ घटनाओं—जैसे विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यात्रा के दौरान सुरक्षा में सेंध और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाधा डालने की कोशिशों—के चलते यह विषय और भी संवेदनशील बन गया था।
विदेश मंत्रालय ने पहले भी ब्रिटिश प्रशासन को आगाह किया था कि ऐसे तत्व लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं। भारत चाहता है कि ब्रिटेन अपने राजनयिक दायित्वों का पालन करते हुए इन गतिविधियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।
बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग पर भी विस्तृत चर्चा हुई। इस मौके पर ब्रिटेन के सौ से अधिक व्यापारिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,
“आज भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार 56 अरब अमेरिकी डॉलर का है। हमें भरोसा है कि 2030 से पहले यह लक्ष्य दोगुना हो जाएगा।”
मोदी ने यह भी घोषणा की कि जल्द ही ब्रिटेन के नौ प्रमुख विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस खोलेंगे। यह दोनों देशों के बीच शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में नए अध्याय की शुरुआत होगी।
कुल मिलाकर, यह बैठक भारत-ब्रिटेन संबंधों को नए आयाम देने और खालिस्तानी गतिविधियों पर सख्त कदम उठाने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

Niraj Tiwari
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