सराईपाली में 105 लोगों की सनातन धर्म में ऐतिहासिक घर वापसी

सराईपाली में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में 105 लोगों ने सनातन धर्म में 'घर वापसी' की है। इस महत्वपूर्ण आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की नई लहर पैदा की है।
रायपुर (CGVARTA)। छत्तीसगढ़ की पावन धरा सराईपाली एक बार फिर सनातन चेतना, वैदिक परंपरा और राष्ट्रधर्म के सशक्त उद्घोष की साक्षी बनी, जब माँ रूद्रेश्वरी की कृपा से 50 से अधिक परिवारों के कुल 104–105 धर्मांतरित व्यक्तियों ने विधिवत सनातन धर्म में घर वापसी की। यह ऐतिहासिक आयोजन सराईपाली स्थित स्वामी सुमेधानंद वैदिक गुरुकुल, कटंगपाली में महर्षि दयानंद मठ धर्मार्थ ट्रस्ट एवं समस्त सनातन समाज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय ‘संगीतमय वैदिक श्रीराम कथा एवं विश्व कल्याण महायज्ञ’ के अंतर्गत संपन्न हुआ।
अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के सान्निध्य में श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ “पैर पखारकर” सभी परिवारों की गरिमामयी घर वापसी कराई गई। वैदिक विधि-विधान, यज्ञ, संस्कार और शुद्धिकरण अनुष्ठानों के साथ यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन स्वाभिमान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का विराट संकल्प बन गया।
धर्मांतरण राष्ट्र सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा : जूदेव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “धर्मांतरण के कारण देश की जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है। भारत के 800 जिलों में से लगभग 200 जिलों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं। यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। देश से बड़ा कुछ नहीं होता, और देश तभी सुरक्षित रहेगा जब उसकी मूल सांस्कृतिक आत्मा सुरक्षित रहेगी।”
उन्होंने दृढ़ संकल्प दोहराते हुए कहा कि “पिताजी स्व. दिलीप सिंह जूदेव द्वारा प्रारंभ किए गए राष्ट्र निर्माण के ‘घर वापसी’ अभियान को हम जीवनपर्यंत आगे बढ़ाते रहेंगे। छत्तीसगढ़ को बंगाल बनने नहीं दिया जाएगा।”
सनातन संस्कृति की रक्षा का सामूहिक संकल्प
इस पावन अवसर पर हरियाणा से पधारी कथा वाचिका विदुषी अंजली आर्या, श्री रविन्द्रदास महाराज, यज्ञ के ब्रह्मा डॉ. कमल नारायण आर्य, आचार्य राकेश आर्य, कपिल शास्त्री, ठाकुर राम, चतुर्भुज आर्य, ऋषिराज, मदन अग्रवाल, अंजू गावेल, रिंकू पाण्डेय, एम. लक्ष्मी, नंदलाल यादव सहित अनेक संत-महात्मा, विद्वान आचार्य, जनजातीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।
सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन पद्धति और राष्ट्र की आत्मा है, जिसकी रक्षा प्रत्येक हिंदू का कर्तव्य है। कार्यक्रम के माध्यम से समाज को संगठित होकर धर्मांतरण के विरुद्ध जागरूक रहने और अपनी संस्कृति, परंपराओं एवं नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया गया।
धार्मिक चेतना के साथ राष्ट्रभाव का जागरण
पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा। यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक चेतना का जागरण बना, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रहित के भाव को सुदृढ़ करने वाला ऐतिहासिक क्षण सिद्ध हुआ। शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

Niraj Tiwari
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