web-logo
  • छत्तीसगढ़

    |

    राष्ट्रीय |
    देश – विदेश |
    खेल |
    मनोरंजन |
    धर्म – संस्कृति |
    लाइफस्टाइल |
  • Stories
  • E-papers
      • छत्तीसगढ़

        25 साल बाद लौटा सुकून: कभी ‘रेड कॉरिडोर’ कहलाने वाले जंगलों में अब गूंज रही है विकास की आवाज़

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Nov 1, 2025, 1:00 PM
        25 साल बाद लौटा सुकून: कभी ‘रेड कॉरिडोर’ कहलाने वाले जंगलों में अब गूंज रही है विकास की आवाज़
        Share :
        14px16px18px20px22px24px
        Speed:

        छत्तीसगढ़ को राज्य बने 25 साल हुए — कभी नक्सल आतंक के गढ़ रहे राजनांदगांव, कवर्धा और बस्तर अब शांति और विकास के रास्ते पर हैं।

        राजनांदगांव। जब 2000 में छत्तीसगढ़ एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब इसे ‘रेड कॉरिडोर’ की भयावह छाया में जीना पड़ा। राजनांदगांव, कवर्धा और बस्तर के घने जंगलों में नक्सली संगठन इतने प्रभावी थे कि कई इलाकों से शासन और प्रशासन का नामोनिशान मिट गया था।

        राज्य गठन के शुरुआती वर्षों में मानपुर, मोहला और गढ़चिरौली सीमा तक नक्सलियों ने अपने पैर पसार लिए थे। चातगांव, औंधी, पेंड्री, मदनवाड़ा, मलाजखंड जैसे दलम पूरे इलाके में सक्रिय थे। स्थानीय प्रशासन तक का दखल सीमित था, लेकिन 25 साल की कड़ी रणनीति और सुरक्षा बलों के बलिदान ने हालात बदल दिए।

        अब राजनांदगांव, खैरागढ़ और कवर्धा जैसे जिले नक्सल मुक्त घोषित हो चुके हैं। सिर्फ सीमावर्ती इलाके में थोड़ी बहुत गतिविधि रह गई है। मोहला-मानपुर को भी आंशिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

        बलिदानों की गाथा, जिसने बदला इतिहास

        12 जुलाई 2009 को कोरकोट्टी हमले में एसपी विनोद चौबे समेत 29 जवानों ने शहादत दी। इसी तरह कोहका विस्फोट में आईटीबीपी के तीन जवान, गातापार हमले में एएसपी युगल किशोर वर्मा सहित तीन जवान, और पुरदौनी मुठभेड़ (2019) में एसआई श्याम किशोर शर्मा ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।

        इन संघर्षों ने लाल आतंक को सीमाओं में कैद कर दिया। अब राज्य के वही वनांचल विकास की रफ्तार पकड़ रहे हैं। सड़कों, स्कूलों और बिजली के तारों ने उन जंगलों तक पहुंच बना ली है, जहां कभी सिर्फ बंदूकों की आवाज गूंजती थी।

        नए युग की शुरुआत

        मानपुर से कवर्धा और मंडला तक जो कॉरिडोर कभी ‘रेड जोन’ कहलाता था, अब विकास कॉरिडोर बन चुका है। शासन की योजनाएं और ग्रामीणों का भरोसा मिलकर उस दर्द को मिटा रहे हैं जो दशकों से इन इलाकों पर हावी था।

        Niraj Tiwari
        author

        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

        Tag :
        मौसम समाचारEDExam Fee UpdateCG Health NewsIED ब्लास्टSTF जवाननक्सली हमलाBijapur NewsIED BlastSTF Jawan
        nextArticle