रातों-रात वोटर-लिस्ट फ्रीज: 12 राज्यों में SIR कल से शुरू, छत्तीसगढ़ के 2.8 करोड़ वोटर्स पर क्या बदलाव?

चुनाव आयोग ने 28 अक्टूबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का दूसरा चरण लागू करने की घोषणा की — छत्तीसगढ़ समेत 12 राज्यों में मतदाता सूची का गहन मिलान, नए मतदाताओं का पंजीकरण और अवैध/दोगुने नाम हटाने का काम शीघ्र शुरू होगा।
रायपुर/नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चलाने का बड़ा ऐलान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आदेश के बाद ये प्रक्रिया 28 अक्टूबर से शुरू हो रही है और इस रात से संबंधित राज्यों की वोटर-लिस्ट फ्रीज कर दी जाएगी। छत्तीसगढ़ में अनुमानित मतदाता संख्या अब लगभग 2.8 करोड़ (राज्य के रजिस्टर अनुसार अपडेट के बाद) के स्तर पर देखी जा रही है, जबकि 1 जनवरी 2025 के आधिकारिक रिकॉर्ड में संख्या 2.11 करोड़ बताई गई थी — इसलिए राज्य में मिलान (टॉप-टेबल एक्सरसाइज) पहले ही कर दी गई है।
SIR का मकसद और दायरा
SIR का प्राथमिक उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है: नए वोटरों को शामिल करना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और दोहरी प्रविष्टियों या गलतियों को ठीक करना। आयोग ने कहा है कि यह 2002-04 के बाद होने वाला सबसे व्यापक गहन पुनरीक्षण है और इसके तहत जिस सूची को अंतिम माना जाएगा वही आगामी चुनावों के लिए कट-ऑफ डेट का काम करेगी।
छत्तीसगढ़ की तैयारियाँ
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने पहले ही जिलों में टेबल-टॉप मिलान करवा लिया है ताकि SIR आते ही घर-घर सर्वे और फॉर्म वितरण का काम बिना विलंब के शुरू किया जा सके। स्थानीय BLÔ (बेसिक-लेवल-ऑफिसर) और अन्य विभागों के स्टाफ को भी ड्यूटी लगाई जा चुकी है ताकि 4 नवम्बर से 4 दिसम्बर के बीच घर-घर एनुमरेशन (पहला चरण) सुचारू हो सके।
कैसे चलेगा पूरा प्रोसेस (मुख्य स्टेप्स)
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प्रिंटिंग/ट्रेनिंग : 28 अक्टूबर — 3 नवम्बर
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घर-घर गणना : 4 नवम्बर — 4 दिसम्बर
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ड्राफ्ट सूची प्रकाशन : 9 दिसम्बर
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दावे-आपत्ति : 9 दिसम्बर — 8 जनवरी 2026
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वेरिफिकेशन/सुनवाई : 9 दिसम्बर — 31 जनवरी 2026
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अंतिम सूची प्रकाशन : 7 फ़रवरी 2026
कड़े नियम और दस्तावेज़-व्यवस्था
चुनाव आयोग ने कहा है कि पहले चरण में enumeration फॉर्म घर-घर बांटे जाएंगे — प्रारम्भिक फेज में दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे। पर जिनके रिकॉर्ड से मिलान नहीं होगा, उनसे आगे दस्तावेज़ मांगे जाएंगे। विभिन्न जन्म-तिथियों के आधार पर आवेदनकर्ता को अलग-अलग प्रकार के प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे (1 जुलाई 1987 से पहले/बाद के नियम अलग) — खासकर 2004 के बाद जन्मे युवाओं के लिए पेरेंट्स का नागरिकता/जन्म दस्तावेज दिखाना जरूरी हो सकता है।
क्यों विवाद भी खड़ा है
Bihar में हुए पहले चरण के SIR को लेकर कानूनी विवाद सुप्रीम-कोर्ट में विचाराधीन है — चुनाव आयोग का कहना है कि बिहार मॉडल सफल रहा और इसे अन्य राज्यों में विस्तार दे रहे हैं; पर विरोधी और कुछ नागरिक-समूह SIR के कड़े दस्तावेजी नियमों के कारण निशानदेही और असहमति जता रहे हैं।
आगामी चुनावों से पहले अहम कदम
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR के बाद बने अंतिम voter list को भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए मानक (cut-off) माना जाएगा। यह कदम देश में मतदाता सूची पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध प्रवासियों की पहचान/हटाने की प्रक्रिया को भी मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

Niraj Tiwari
Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.
