नक्सल संगठन में फूट: पूर्वी रीजनल ब्यूरो ने कहा - लगातार सरेंडर से पार्टी कमजोर, तेलंगाना कमेटी ने सरकार के आगे झुका सिर

CRB क्षेत्र में भारी नुकसान, तेलंगाना में एकतरफा युद्धविराम की निंदा — शाह बोले, 2026 तक नक्सलवाद का होगा अंत।
by - Thaneshwar Sahu
रायपुर। नक्सल संगठन में अंदरूनी फूट की खबर सामने आई है। पूर्वी रीजनल ब्यूरो (ERB) के लीडर्स ने दावा किया है कि लगातार हो रहे सरेंडर से पार्टी कमजोर हो रही है और कई इलाकों में कैडर ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है।
प्रवक्ता ‘संकेत’ ने दो पेज का प्रेस नोट जारी कर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की लगातार कार्रवाई से संगठन को गंभीर नुकसान हुआ है।
उन्होंने लिखा —
“CRB यानी सेंट्रल रीजनल ब्यूरो के इलाकों में, जहां छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा और आंध्र प्रदेश शामिल हैं, बड़ी संख्या में सीनियर नक्सल कैडर ने आत्मसमर्पण किया है। यह हमारे लिए सबसे बड़ा नुकसान है।”
शांतिवार्ता से नहीं निकला कोई परिणाम
प्रेस नोट में कहा गया कि लगातार सरकारी हमलों और साथियों के मारे जाने से कुछ नेताओं ने शांति वार्ता का आह्वान किया था। लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंचने के कारण कई ने अपने जीवन के भय से आत्मसमर्पण कर दिया।
संकेत ने लिखा —
“क्रांतिकारी आंदोलन में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं, लेकिन वर्तमान में हो रहे पलायनवाद ने पार्टी की रीढ़ कमजोर की है।”
वरिष्ठ नेताओं के सरेंडर पर संगठन में नाराज़गी
प्रेस नोट के अनुसार, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू, छत्तीसगढ़ के कांकेर और जगदलपुर में CCM सतीश, और तेलंगाना में चंद्रन्ना सीसीएम ने आत्मसमर्पण किया है।
ERB ने इसे “क्रांतिकारी मूल्यों से पलायन” बताया और कहा कि ये सरेंडर पार्टी की एकता को कमजोर कर रहे हैं।
तेलंगाना कमेटी पर आरोप — सरकार से गुप्त समझौता
प्रवक्ता संकेत ने तेलंगाना राज्य कमेटी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वहां के नेताओं ने बिना जानकारी के तेलंगाना सरकार के साथ युद्धविराम समझौता किया।
तेलंगाना कमेटी ने पिछले 6 महीनों से एकतरफा युद्धविराम लागू किया है और आगे भी 6 महीने तक जारी रखने की घोषणा की है।
ERB ने इसे “अनौपचारिक आत्मसमर्पण” बताते हुए निंदा की।
सरकार का दावा — नक्सलवाद के अंत की ओर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त और दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के दौरे के दौरान कहा था कि
“31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। हिंसा करोगे तो जवान जवाब देंगे।”
शाह की इस डेडलाइन के बाद बस्तर में ऑपरेशन तेज हुआ है। बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं, जबकि कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं।
20 महीने में 1,876 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
बस्तर IG सुंदरराज पी के अनुसार, पिछले 20 महीनों में 1,876 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
उन्होंने कहा —
“सरकार की पुनर्वास नीति से जुड़कर नक्सली समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। आने वाले समय में और भी माओवादी इस सकारात्मक रास्ते को अपनाएंगे।”

Niraj Tiwari
Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.
