छत्तीसगढ़ पुलिस को मिल सकता है बड़ा तोहफा: हर महीने 5 हजार रुपये विशेष भत्ता देने की सिफारिश

वेतन-भत्ता पुनरीक्षण कमेटी ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, अब गृह विभाग के फैसले पर टिकी निगाहें
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के पुलिस कर्मियों के वेतन और भत्तों में बदलाव को लेकर गठित पुनरीक्षण समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों को हर महीने एकमुश्त 5 हजार रुपये विशेष पुलिस रिस्पांस एलाउंस देने की अहम सिफारिश की गई है।
समिति ने अलग-अलग मदों में दिए जा रहे भत्तों की समीक्षा के बाद सुझाव दिया है कि आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के पुलिस कर्मियों को यह राशि प्रतिमाह प्रदान की जा सकती है। अब इस रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय गृह विभाग को लेना है।
इस कमेटी के अध्यक्ष एडीजी एसआरपी कल्लुरी हैं, जबकि डीआईजी अरविंद कुजूर, मनीष शर्मा, वित्त नियंत्रक शंकर झा, एआईजी रोहित झा और अंशुमन सिसोदिया इसके सदस्य रहे। समिति ने कुल पांच बैठकों में पुलिस के वेतन-भत्तों की समीक्षा की और अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया।
कमेटी ने पाया कि बढ़ती महंगाई के मुकाबले पुलिसकर्मियों को मिलने वाले भत्ते काफी कम हैं। इसी कारण लंबे समय से पुलिस संगठन भत्तों में संशोधन की मांग कर रहे थे, जिसके बाद इस समिति का गठन किया गया था।
भत्तों में बढ़ोतरी की सिफारिश
रिपोर्ट में कई भत्तों को बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसमें पौष्टिक आहार भत्ता 100 से बढ़ाकर 1000 रुपये, वर्दी धुलाई भत्ता 60 से बढ़ाकर 500 रुपये और रायफल भत्ता 200-300 की जगह 1000 रुपये करने की सिफारिश शामिल है।
इसके अलावा राशन भत्ता 2000 रुपये, एसपीएफ कर्मियों के लिए 2200 रुपये, यात्रा भत्ता 75-100 से बढ़ाकर 1000 रुपये और वाहन भत्ता 100 से बढ़ाकर 1500 रुपये करने का सुझाव दिया गया है। वर्दी भत्ता भी 800 रुपये से बढ़ाकर हर तीन साल में 4000 रुपये करने की अनुशंसा की गई है।
विशेष रिस्पांस एलाउंस का विकल्प
कमेटी ने यह विकल्प भी रखा है कि राशन भत्ता और वर्दी भत्ता को छोड़कर अन्य सभी भत्तों को समाप्त कर दिया जाए और इसके बदले विशेष पुलिस रिस्पांस एलाउंस के रूप में 5 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएं। यह राशि आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक के सभी अराजपत्रित पुलिस कर्मियों को दी जा सकती है।
अब पुलिसकर्मियों की नजर सरकार और गृह विभाग के फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि इससे हजारों जवानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल सकता है।

Niraj Tiwari
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