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        धान सूखने पर बड़ी कार्रवाई: कई सोसाइटी प्रबंधक हटाए जाएंगे, प्राधिकृत अधिकारी विरोध में लेकिन खुलकर नहीं बोल पा रहे

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Nov 7, 2025, 4:11 PM
        धान सूखने पर बड़ी कार्रवाई: कई सोसाइटी प्रबंधक हटाए जाएंगे, प्राधिकृत अधिकारी विरोध में लेकिन खुलकर नहीं बोल पा रहे
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        धान में सूखत से हुई कमी पर सहकारिता पंजीयक ने आदेश जारी किए — अभनपुर क्षेत्र की कई समितियों के प्रबंधक इस साल की धान खरीदी से होंगे अलग।


        By - Thaneshwar Sahu
        रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी में सूखत (Drying Loss) के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
        सहकारिता पंजीयक कार्यालय ने आदेश जारी कर उन सहकारी सोसाइटी प्रबंधकों को इस साल की धान खरीदी से अलग करने के निर्देश दिए हैं, जिनकी समितियों में खरीदे गए धान की मात्रा सूखने के बाद कम पाई गई है।

        हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि सोसाइटियों के प्राधिकृत अधिकारी इस कार्रवाई के खिलाफ हैं, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के चलते खुलकर सामने नहीं आ रहे।


        क्या है मामला?

        खरीफ सीजन 2024-25 के दौरान राज्य की 2,739 सहकारी सोसाइटियों के माध्यम से नवंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था।

        जब धान को मिलरों और भंडारण केंद्रों तक भेजा गया और तौल-मिलान किया गया, तो पाया गया कि गर्मी और प्राकृतिक कारणों से धान की मात्रा में कमी (सूखत) आ गई है।

        सहकारिता विभाग ने इस कमी के लिए सोसाइटी प्रबंधकों को जिम्मेदार ठहराया है।


        जारी हुआ आदेश – 7 दिन में जवाब मांगा गया

        उप पंजीयक, सहकारी संस्थाएं रायपुर ने आदेश जारी कर अभनपुर क्षेत्र की कई सोसाइटियों के प्रबंधकों को खरीदी कार्य से अलग रखने को कहा है।

        इनमें शामिल हैं —
        बंजारी, पिपरौद, तोरला, सुंदरकेरा, चंपाझर, पोंड, जामगांव, टीला, मानिकचौरी आदि सोसाइटियां।

        आदेश में कहा गया है कि —

        “धान में सूखत की मात्रा के कारण हुई कमी के लिए जिम्मेदार सोसाइटी प्रबंधकों को इस साल की खरीदी से पृथक किया जाए।
        नए प्रभारी की नियुक्ति कर 7 दिनों के भीतर कार्यालय को सूचित करें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”


        प्राधिकृत अधिकारी प्रबंधकों के पक्ष में

        सूत्रों के मुताबिक, रायपुर जिले में ज्यादातर प्राधिकृत अधिकारी सोसाइटी प्रबंधकों के समर्थन में हैं, लेकिन वे खुलकर कुछ नहीं कह पा रहे।
        एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया —

        “धान सूखत का मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। जब तक न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई उचित नहीं है।”

        दरअसल, सोसाइटी चुनाव न होने के कारण शासन ने अध्यक्ष की जगह प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति की है, जिनमें से अधिकतर भाजपा समर्थक माने जाते हैं।


        प्रबंधकों ने दी सफाई – समय पर उठाव नहीं हुआ था धान का

        सहकारिता पंजीयक के आदेश के बाद सोसाइटी प्रबंधकों ने कलेक्टरों को पत्र लिखकर अपनी सफाई दी है।
        उनका कहना है कि धान की मात्रा कम होने के लिए सरकारी एजेंसियां जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने समय पर धान का उठाव नहीं किया।

        प्रबंधकों का पक्ष —

        “हमारी समिति में निर्धारित सीमा से अधिक धान संग्रहित रहा।
        बार-बार निवेदन करने के बावजूद भी धान का उठाव समय पर नहीं हुआ, जिससे प्राकृतिक कारणों जैसे सूखावट, चूहों और मौसम की वजह से धान में कमी आई।
        अब हमारे खिलाफ वसूली और आपराधिक कार्रवाई की धमकी दी जा रही है, जबकि यह प्राकृतिक और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।”


        हाईकोर्ट में चल रहा मामला

        प्रबंधकों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा कि जब तक न्यायालय से अंतिम निर्णय नहीं आता,
        किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई विधिसम्मत नहीं है।
        हाईकोर्ट ने भी पहले कहा था कि धान के उठाव में हुई देरी और प्राकृतिक हानि को ध्यान में रखते हुए
        नीति के प्रावधानों के तहत निर्णय लिया जाए।

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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