छत्तीसगढ़ में फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को मंडी शुल्क में 5 करोड़ तक की छूट: स्थानीय युवाओं को रोजगार देना होगा अनिवार्य

राज्य सरकार ने कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति में किया संशोधन — स्थानीय निवासियों को रोजगार देने पर ही मिलेगी छूट का लाभ।
By - Thaneshwar Sahu
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों को बड़ा राहत पैकेज देने की घोषणा की है।
नई संशोधित नीति के तहत राज्य में स्थापित या विस्तारित फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को अब 5 करोड़ रुपए तक मंडी शुल्क में छूट मिल सकेगी।
हालांकि, यह छूट कुछ शर्तों पर ही दी जाएगी —
राज्य सरकार का स्पष्ट कहना है कि यह लाभ स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों को ही मिलेगा।
नई नीति की प्रमुख शर्तें
नई व्यवस्था के अनुसार, जो उद्योग राज्य के मूल निवासियों को स्थायी रोजगार देंगे, वे ही छूट के पात्र होंगे।
इन उद्योगों को निम्न रोजगार मानकों का पालन करना होगा —
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अकुशल कर्मचारियों / श्रमिकों के मामलों में: 100% स्थानीय रोजगार
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कुशल कर्मचारियों के मामलों में: कम से कम 70% स्थानीय रोजगार
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प्रशासकीय या प्रबंधकीय कर्मचारियों के मामलों में: न्यूनतम 40% स्थानीय रोजगार
इकाई को छूट प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख से कम से कम पांच वर्षों तक संचालन में रहना होगा।
किसे मिलेगा लाभ
राज्य सरकार ने कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के माध्यम से यह संशोधन कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 के अंतर्गत जारी मंडी शुल्क छूट नियम 2014 में किया है।
यह छूट नवीन इकाइयों, विस्तारित उद्योगों और प्रतिस्थापन या शवलीकरण के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को मिलेगी।
हालांकि, औद्योगिक नीति में वर्णित अपात्र उद्योगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
2019 से पहले शुरू हुई इकाइयों पर भी लागू होगा नियम
यह नया नियम उन उद्योगों पर भी लागू होगा जिन्होंने 1 नवंबर 2019 से पहले वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ किया है, बशर्ते उन्होंने अपने प्लांट एवं मशीनरी में 25% अतिरिक्त निवेश किया हो।
विस्तार के बाद यदि उनकी उत्पादन क्षमता में 25% की वृद्धि और कुल रोजगार में 10% की बढ़ोतरी होती है, तो वे भी छूट के पात्र होंगे।
मंडी शुल्क में 5 करोड़ तक की छूट
पात्र उद्योगों को पहले कच्चा माल खरीदे जाने या प्रमाण पत्र जारी होने की तिथि (जो भी बाद में हो) से 5 वर्ष तक मंडी शुल्क से पूर्ण छूट मिलेगी।
यह छूट अधिकतम ₹5 करोड़ प्रतिवर्ष की होगी,
परंतु कुल छूट कुल पूंजी निवेश के 75% से अधिक नहीं दी जाएगी।
इन वर्गों को मिलेगी अतिरिक्त छूट (6 वर्ष तक)
राज्य सरकार ने कुछ विशेष श्रेणियों के लिए छूट की अवधि और सीमा दोनों बढ़ा दी है —
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अनुसूचित जाति एवं जनजाति उद्यमी
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महिला उद्यमी
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भारतीय सेना और अग्निवीर से सेवानिवृत्त व्यक्ति
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नक्सल प्रभावित परिवार
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निशक्तजन (Divyang)
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अप्रवासी भारतीय
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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) वाले उद्यम
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विदेशी तकनीक आधारित प्रोजेक्ट
इन वर्गों को 6 वर्ष तक मंडी शुल्क में पूर्ण छूट मिलेगी, जिसकी सीमा ₹5.50 करोड़ प्रति वर्ष तक होगी।
यह भी कुल पूंजी निवेश के 75% से अधिक नहीं होगी।

Niraj Tiwari
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