छत्तीसगढ़ में प्राचार्यों को ‘कुत्तों की निगरानी’ की ड्यूटी, DPI के आदेश पर हंगामा, कांग्रेस ने साधा निशाना

DPI ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर सरकारी स्कूलों के प्राचार्य व हेडमास्टरों को आवारा कुत्तों की निगरानी का जिम्मा सौंपा। शिक्षकों और राजनीतिक दलों ने निर्णय का कड़ा विरोध किया।
by - Thaneshwar sahu
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में एक नया और विवादित आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सभी सरकारी स्कूलों के प्राचार्य और हेडमास्टरों को स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों की निगरानी और रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी सौंप दी है। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया गया है, लेकिन इससे शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन में नाराजगी फैल गई है।
प्राचार्यों का विरोध—“पढ़ाई छोड़कर कुत्ते पकड़वाएंगे?”
प्राचार्यों और हेडमास्टरों का कहना है कि वे पहले ही
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SIR रिपोर्ट,
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प्रशासनिक कामकाज
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और स्कूल प्रबंधन
जैसी कई जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं।
अब “डॉग मॉनिटरिंग” जैसी नई ड्यूटी देने से उनका मूल कार्य डिस्टर्ब होगा। DPI के आदेश के मुताबिक स्कूलों को जरूरत पड़ने पर
नगर निगम, नगर पंचायत और जनपद पंचायत के डॉग क्रैचर को तुरंत सूचना देनी होगी।
कांग्रेस का हमला—“शिक्षकों को श्वान प्रभार!”
कांग्रेस ने इस आदेश पर कड़ा ऐतराज़ जताते हुए इसे शिक्षकों का अपमान बताया।
पार्टी ने एक व्यंग्यात्मक कार्टून जारी किया, जिसमें लिखा है—
“शिक्षकों को श्वान प्रभार—छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार।”
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार में शिक्षकों को पढ़ाई छोड़कर अब कुत्तों की निगरानी करनी पड़ेगी, जो शिक्षा व्यवस्था के साथ मज़ाक है।
सोशल मीडिया पर भी चला ट्रोलिंग का दौर
सोशल मीडिया यूज़र्स ने DPI के इस आदेश की आलोचना करते हुए कई मीम्स, कार्टून और टिप्पणियाँ साझा की हैं।
कई लोगों ने लिखा—
“अब प्राचार्य डॉग कैचर बनेंगे?”
“शिक्षकों को पढ़ाना है या स्ट्रे डॉग सर्विलेंस?”
आदेश को लेकर शिक्षकों और आम जनता दोनों की तरफ से लगातार प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।

Niraj Tiwari
Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.
