अस्पताल विवाद: नवजात के सीने पर ‘एचआईवी पॉजिटिव मदर’ का बोर्ड, हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया माता-पिता को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का, अगले सुनवाई 30 अक्टूबर।
बिलासपुर। डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में नवजात बच्चे के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। जन्म के कुछ दिन बाद ही बच्चे के सीने पर एक बड़ा बोर्ड चस्पा कर दिया गया, जिसमें लिखा था कि इसकी मां एचआईवी पॉजिटिव है। यह घटना अस्पताल की संवेदनहीनता और मरीज की निजता का घोर उल्लंघन मानी जा रही है।
हाईकोर्ट ने इसे अमानवीय, असंवैधानिक और असंवेदनशील कृत्य करार देते हुए राज्य सरकार को माता-पिता को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साथ ही मुख्य सचिव से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।
मिली जानकारी के अनुसार, 26 वर्षीय महिला तिल्दा क्षेत्र की निवासी है। 4 अक्टूबर को प्रसव पीड़ा होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला एचआईवी से संक्रमित हैं और बच्चे को जन्म देने के बाद उसकी सेहत कमजोर पाई गई, इसलिए बच्चे को नर्सरी में उपचार के लिए रखा गया।
मासूम के पिता ने बताया कि नर्सरी में बच्चे के सीने पर बोर्ड चस्पा किया गया, जिसमें बड़े अक्षरों में लिखा था ‘एचआईवी पॉजिटिव मदर’, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से यह पहचान सकता था। साथ ही, थंब इंप्रेशन (अंगूठे के निशान) के फॉर्म में भी बच्चे और मां की स्वास्थ्य स्थिति का खुलासा था।
एड्स नियंत्रण समिति के अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉ. खेमराज सोनवानी ने कहा कि किसी भी संक्रमित व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पूरे प्रदेश के अस्पतालों को सर्कुलर जारी करने और नियम पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

Niraj Tiwari
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