ईडी की मारपीट शिकायत पर हाईकोर्ट की टिप्पणी: याचिकाकर्ता मजिस्ट्रेट के पास जाएं, कोर्ट ने जांच से किया इनकार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के खाद-कीटनाशक कारोबारी हेमंत चंद्राकर की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) से जुड़े कथित कस्टोडियल टॉर्चर के मामले में अहम टिप्पणी की है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की डिविजन बेंच ने कहा कि —
“अगर याचिकाकर्ता को ईडी अधिकारियों द्वारा मारपीट या धमकी की शिकायत है, तो वे सीआरपीसी की धारा 156(3) या धारा 200 के तहत मजिस्ट्रेट के पास जा सकते हैं।”
दरअसल, याचिकाकर्ता हेमंत चंद्राकर, रायपुर के निवासी हैं और “शृष्टि ऑर्गेनिक्स” नाम से खाद-कीटनाशक निर्माण इकाई चलाते हैं। उन्होंने दावा किया कि 3 सितंबर 2025 को ईडी की टीम ने उनके घर पर छापा मारा और परिवार को मानसिक दबाव में रखा। याचिका के अनुसार, उनसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके सहयोगियों के खिलाफ बयान देने का दबाव बनाया गया था।
चंद्राकर का आरोप है कि मना करने पर ईडी अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की, सीसीटीवी कैमरे बंद करवाए और जबरन बयान दिलवाया।
वहीं, ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू और डॉ. सौरभ पांडे ने अदालत को बताया कि पूछताछ पूरी तरह सीसीटीवी निगरानी में होती है और किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की गई।
कोर्ट ने कहा कि —
“यदि याचिकाकर्ता चाहे तो मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकते हैं।”
हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच या एफआईआर के आदेश देने से इनकार करते हुए याचिका को निराकृत (disposed of) कर दिया है।

Niraj Tiwari
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