महादेव ऐप का संचालक सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार: फर्जी पासपोर्ट का आरोप, 7 साल से फरार

महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप के संचालक सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार किया गया है। उन पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है। सौरभ चंद्राकर 7 साल से फरार थे और उनके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया था।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप के संचालक सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार किया गया है। उन पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करने का आरोप है। सौरभ चंद्राकर 7 साल से फरार थे और उनके खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी किया गया था।
सौरभ चंद्राकर को भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उन्हें वापस लाने के लिए ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण की तैयारियों में जुटी है।
सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है और वह 5000 करोड़ रुपये के बेटिंग घोटाले का आरोपी है। उन्हें 2019 से फरार हैं और उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई जांच कर रहे हैं।
फर्जी पासपोर्ट से ओमान पहुंचने का आरोप मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल और अवैध तरीके से ओमान में प्रवेश करने का मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी पैरवी के लिए मस्कट में वकीलों की एक टीम भी नियुक्त की है।
इंटरपोल रेड नोटिस बरकरार सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई हजारों करोड़ रुपये के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं।
हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL's Files (CCF) ने चंद्राकर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। चंद्राकर का दावा था कि भारत में उनके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी। लेकिन सीसीएफ ने कहा कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, न कि राजनीतिक उत्पीड़न से। इसलिए रेड नोटिस जारी रहेगा।
क्या होता है रेड नोटिस इंटरपोल रेड नोटिस इंटरपोल द्वारा जारी किया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय अलर्ट है। इसका उद्देश्य किसी ऐसे आरोपी या दोषी व्यक्ति का पता लगाना और उसे अस्थायी रूप से हिरासत में लेना होता है, ताकि बाद में उसका प्रत्यर्पण या कानूनी कार्रवाई की जा सके।
भारत लाने में आ सकती हैं कानूनी अड़चनें मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सौरभ चंद्राकर ने सीसीएफ में सुनवाई के दौरान ही यूएई छोड़ दिया था। अधिकारियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश करना उसकी एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, ताकि भारत प्रत्यर्पण प्रक्रिया में देरी हो। ओमान के कानून के तहत फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल गंभीर अपराध माना जाता है, जिसकी सजा 3 से 5 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकती है।

Niraj Tiwari
Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.
