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        पूर्व डिप्टी सीएम के परिवार की हत्या में 2 आरोपियों को उम्रकैद, 3 बरी

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Mar 28, 2026, 5:43 PM
        पूर्व डिप्टी सीएम के परिवार की हत्या में 2 आरोपियों को उम्रकैद, 3 बरी
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        छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पूर्व डिप्टी सीएम प्यारेलाल कंवर के परिवार की हत्या में 2 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, जबकि 3 आरोपी बरी कर दिए गए हैं। यह मामला 2021 में सामने आया था जब प्यारेलाल कंवर के बेटे हरीश कंवर, उनकी पत्नी सुमित्रा और बेटी आशी की हत्या हुई थी।

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        छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पूर्व डिप्टी सीएम प्यारेलाल कंवर के परिवार की हत्या में 2 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, जबकि 3 आरोपी बरी कर दिए गए हैं। यह मामला 2021 में सामने आया था जब प्यारेलाल कंवर के बेटे हरीश कंवर, उनकी पत्नी सुमित्रा और बेटी आशी की हत्या हुई थी।

        इस मामले में पुलिस जांच में सामने आया था कि हरीश कंवर के बड़े भाई हरभजन सिंह कुंवर, उनकी पत्नी धनकुवंर, साला परमेश्वर, दोस्त राम प्रसाद मान्येवर और सुरेंद कुमार कंवर आरोपी थे। लेकिन हाईकोर्ट ने अपने फैसले में परमेश्वर और राम प्रसाद मान्येवर को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि हरभजन सिंह कुंवर, धनकुवंर और सुरेंद कुमार कंवर को बरी कर दिया है।

        प्यारेलाल कंवर अविभाजित मध्यप्रदेश में एक प्रमुख आदिवासी नेता थे। वे कोरबा जिले की रामपुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते थे और कांग्रेस नेता थे। उन्हें 1997-1998 में मध्यप्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें जबलपुर के मढ़ाताल भूमि घोटाले में पद से हटा दिया गया था।

        हरीश कंवर की हत्या का मामला पैसों और जमीन के लेन-देन को लेकर विवाद से जुड़ा हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया था कि हरभजन सिंह कुंवर और उसके साथी ने घर में घुसकर धारदार हथियार से वारदात को अंजाम दिया था।

        इस मामले में निचली अदालत ने सभी 5 आरोपियों को दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 2 आरोपियों को उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है, जबकि 3 आरोपियों को बरी कर दिया है।

        यह मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हुए एक चर्चित ट्रिपल मर्डर केस से जुड़ा हुआ है। इस मामले में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

        इस पूरे मामले में सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है। यह मामला आदिवासी समाज में पैसों और जमीन के लेन-देन को लेकर विवाद को दर्शाता है।

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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