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        गरियाबंद में 3 दिन में 3 मासूमों की मौत: झाड़-फूंक, अंधविश्वास और झोलाछाप ने छीनी तीन ज़िंदगी

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Nov 17, 2025, 4:12 PM
        गरियाबंद में 3 दिन में 3 मासूमों की मौत: झाड़-फूंक, अंधविश्वास और झोलाछाप ने छीनी तीन ज़िंदगी
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        धनोरा गांव में दर्दनाक घटना — इलाज के बजाय तांत्रिक के पास ले गए, 8, 7 और 4 साल के भाई-बहन ने खो दी जान, जांच टीम गाँव रवाना


        By – Thaneshwar Sahu
        गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में अंधविश्वास और झोलाछाप इलाज ने एक ही परिवार के तीन बच्चों की जान ले ली।
        मैनपुर ब्लॉक के धनोरा गांव में 3 दिन के भीतर तीन सगे भाई-बहन की मौत ने पूरे इलाके को दहला दिया है।

        बच्चों के पिता डमरुधर नागेश मजदूरी करते हैं और घटना के समय परिवार के साथ ससुराल में मक्का तोड़ने गए थे। वहीं से बुखार की शुरुआत हुई।


         डॉक्टर नहीं, तांत्रिक के पास ले गए बच्चे

        बच्चों को अचानक तेज बुखार आया,
        लेकिन इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय
        परिवार ने पहले झोलाछाप डॉक्टर से दवा ली —
        और जब राहत नहीं मिली तो बच्चों को झाड़-फूंक कराने बैगा-गुनिया के पास ले गए।

        इसी दौरान तीनों मासूमों की मौत हो गई।


         3 दिन में तीन मौत — दर्दनाक टाइमलाइन

        11 नवंबर — 8 साल की बेटी अनिता की हालत बिगड़ी,
        अमलीपदर अस्पताल ले जाने तक मौत हो चुकी थी।

        13 नवंबर सुबह — 7 साल के बेटे ऐकराम को देवभोग ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड़ा।

        13 नवंबर शाम — 4 साल के गोरश्वर की जंगल में झाड़-फूंक के दौरान मौत हो गई।


         मितानिन ने बताया पूरा सच

        धनोरा की मितानिन कुमारी कामता नागेश ने कहा —

        "पहले एक बच्चा गया, फिर उसी दिन दो और बच्चों ने दम तोड़ दिया।
        तीनों एक ही परिवार के थे… हम सब हिल गए हैं।"


         डॉक्टर बोले — परिजन जांच कराने ही नहीं आए

        अमलीपदर अस्पताल के डॉक्टर रमाकांत का कहना है —

        "सीएमओ ने बच्चों के घरवालों से टेस्ट कराने कहा,
        लेकिन वे नहीं माने — अस्पताल भी देर से पहुंचे।"


         प्रशासन हरकत में — 4 सदस्यीय टीम गांव भेजी गई

        CMHO एसके नवरत्न ने घटना को गंभीर बताया और कहा —

        “बच्चों की मौत की वजह अंधविश्वास और गलत इलाज दिखती है।
        जांच टीम गांव भेज दी गई है। रिपोर्ट जल्द होगी।”


         पिता मजदूर, मां सदमे में

        परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है।
        बच्चों की मौत के बाद मां का रो-रोकर बुरा हाल है।


         ग्रामीण बोले — अस्पताल दूर, एम्बुलेंस नहीं आती

        ग्रामीणों ने कहा —

        • अस्पताल 20–25 km दूर

        • समय पर एम्बुलेंस नहीं आती

        • डॉक्टर अक्सर नहीं मिलते

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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