आरंग में आबकारी विभाग मस्त, शराब दुकानों में ओवर-रेटिंग से जनता पस्त!

एक तरफ पूरा छत्तीसगढ़ त्योहारों के उल्लास और उमंग में डूबा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ राजा मोरध्वज की नगरी आरंग में आबकारी विभाग की लापरवाह कार्यशैली ने त्योहारी रौनक फीकी करनी शुरू कर दी है।
रायपुर (CGVARTA)। एक तरफ पूरा छत्तीसगढ़ त्योहारों के उल्लास और उमंग में डूबा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ राजा मोरध्वज की नगरी आरंग में आबकारी विभाग की लापरवाह कार्यशैली ने त्योहारी रौनक फीकी करनी शुरू कर दी है। क्षेत्र में इन दिनों आबकारी अमले की कथित 'मेहरबानी' से शराब दुकानों में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दुकानों पर ओवर-रेटिंग का अवैध खेल अपने चरम पर है, तो वहीं दूसरी ओर कोचियों को भी नियमों के विरुद्ध शराब की निर्बाध सप्लाई मिलने की पुख्ता चर्चाएं हैं।
त्योहारों के नाम पर लूट, जेब पर सीधी कैंची
त्योहारी सीजन में लोग अपने परिवारों के साथ खुशियां बांटने में व्यस्त हैं, लेकिन आरंग की शराब दुकानों पर पहुंचने वाले खरीदार आबकारी महकमे की सुस्ती का शिकार हो रहे हैं। यहां हर ब्रांड की शराब पर तय सरकारी कीमत से अधिक रुपए वसूले जा रहे हैं। काउंटर पर बैठे लोग ग्राहकों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुलेआम मनमाने दाम वसूल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस लूट-खसोट की पूरी जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार आबकारी अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं, जिससे विभाग की मंशा पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
गांव-गांव तक पहुंच रही अवैध शराब, पनप रहे कोचिए
सिर्फ दुकानों के भीतर चल रही ओवर-रेटिंग ही नहीं, बल्कि इस पूरे खेल का सबसे खतरनाक पहलू अवैध सप्लाई नेटवर्क है। सूत्रों के मुताबिक, दुकानों से सांठगांठ कर क्षेत्र के सक्रिय कोचियों और अवैध शराब विक्रेताओं को आसानी से माल मुहैया कराया जा रहा है। त्योहारों के इस सीजन में गांव-गांव तक अवैध शराब की खेप पहुंचाने का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे युवा पीढ़ी और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा हो रहा है।
जनता में आक्रोश, प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
त्योहार के इस पवित्र माहौल में इस तरह के अवैध और मनमाने कारोबार के फलने-फूलने से स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब तक उच्च स्तर से मैदानी अमले पर सख्त चाबुक नहीं चलेगा, तब तक यह अवैध कमाई का खेल थमेगा नहीं।
अब यह देखना बेहद दिलचस्प और जरूरी होगा कि क्या जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और आबकारी विभाग इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए कोई बड़ी कार्रवाई करते हैं, या फिर त्योहार के नाम पर आम जनता की जेब यूं ही कटती रहेगी।

