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        CIMS में पहली बार प्लाज़्माफ़ेरेसिस से गंभीर मरीज का सफल इलाज, निजी अस्पतालों में होता है महँगा

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Sep 25, 2025, 5:52 PM
        CIMS में पहली बार प्लाज़्माफ़ेरेसिस से गंभीर मरीज का सफल इलाज, निजी अस्पतालों में होता है महँगा
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        CIMS में पहली बार प्लाज़्माफ़ेरेसिस से गंभीर मरीज का सफल इलाज, निजी अस्पतालों में होता है महँगा

        बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) बिलासपुर में चिकित्सा इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया है। यहां मेडिसिन विभाग ने पहली बार प्लाज़्माफ़ेरेसिस (Plasmapheresis) तकनीक का सफल उपयोग कर एक 19 वर्षीय गंभीर मरीज का इलाज किया। युवती लंबे समय से कमजोरी और खून की कमी की समस्या से जूझ रही थी। जाँच में पाया गया कि उसके शरीर में हानिकारक प्रोटीन अत्यधिक मात्रा में जमा हो गए थे और रक्त में आवश्यक प्रोटीन का स्तर खतरनाक रूप से घट गया था। यह स्थिति जानलेवा हो सकती थी।

        क्या है प्लाज़्माफ़ेरेसिस?

        यह तकनीक तब उपयोगी होती है जब रक्त के प्लाज़्मा में हानिकारक एंटीबॉडी, प्रोटीन या टॉक्सिन जमा हो जाते हैं और सामान्य दवाइयों से सुधार नहीं होता। इसमें मशीन की सहायता से रक्त से प्लाज़्मा अलग कर उसमें मौजूद हानिकारक तत्वों को हटाया जाता है और शुद्ध रक्त को वापस शरीर में पहुँचाया जाता है।

        किन बीमारियों में कारगर है?

        • न्यूरोलॉजिकल रोग: गुइलेन-बार्रे सिंड्रोम (GBS), मायस्थेनिया ग्रेविस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, न्यूरोमायेलाइटिस ऑप्टिका

        • रक्त संबंधी रोग: हेमोलिटिक यूरमिक सिंड्रोम, मल्टीपल मायलोमा, सिकल सेल डिजीज आदि

        • किडनी और लिवर रोग

        • ऑटोइम्यून बीमारियाँ: सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (SLE), रूमेटॉइड आर्थराइटिस, डर्माटोमायोसाइटिस/पॉलीमायोसाइटिस

        • गंभीर COVID-19 मामलों में भी इसका उपयोग किया गया था।

        CIMS टीम ने किया सफल उपचार

        मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अमित ठाकुर के नेतृत्व में डॉ. आशुतोष कोरी, डॉ. सुयश सींग, डॉ. किशले देवांगन, डॉ. अर्पणा पांडेय और उनकी टीम ने मरीज का सफल इलाज किया। अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के मार्गदर्शन में यह उपचार निशुल्क उपलब्ध कराया गया।

        निजी अस्पतालों में महँगा होता है इलाज

        सामान्यतः निजी अस्पतालों में यह प्रक्रिया 40 से 50 हजार रुपये तक महँगी होती है। मगर CIMS ने इसे पहली बार सरकारी स्तर पर मुफ्त में उपलब्ध कराकर प्रदेश के मरीजों को बड़ी राहत दी है।

        मरीज की हालत में सुधार

        सफल उपचार के बाद युवती की हालत सामान्य है और वह स्वास्थ्य लाभ कर रही है। CIMS प्रबंधन का कहना है कि भविष्य में इस तकनीक से प्रदेश के और भी मरीजों को लाभ मिलेगा।

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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