शिक्षा का अधिकार : जहां से बच्चों की औपचारिक शिक्षा प्रारंभ होती है कानून का दायरा वहां तक : हाई कोर्ट

उच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार कानून के दायरे पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून बच्चों की औपचारिक शिक्षा के प्रारंभिक बिंदु तक लागू होता है, जिससे इसके क्रियान्वयन को लेकर नई दिशा मिलेगी।
रायपुर/बिलासपुर (CGVARTA)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) को लेकर आज एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि यह कानून केवल कक्षा-1 से पढ़ने वाले बच्चों तक सीमित नहीं है।
जहां से बच्चे की औपचारिक शिक्षा शुरू होती है वहीं से RTE लागू होगा। यानी अब प्री-प्राइमरी, नर्सरी और प्ले स्कूल भी RTE के दायरे में आएंगे।
हाईकोर्ट की इस व्याख्या ने राज्य में धड़ल्ले से चल रहे ग़ैर-मान्यता प्राप्त और अवैध प्ले स्कूलों की नींव हिला दी है। न्यायालय ने इन स्कूलों को लेकर गहरी चिंता जताते हुए राज्य शासन को कड़े शब्दों में निर्देश दिए कि उनकी मान्यता, निगरानी और संचालन के लिए स्पष्ट और प्रभावी नियम जल्द से जल्द बनाए जाएं।
बच्चों पर अत्याचार का मामला उठा, शासन कटघरे में
वंचित, शोषित और ग़रीब छात्रों के निःशुल्क शिक्षा के अधिकार के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे विकास तिवारी ने हाईकोर्ट का ध्यान प्री-प्राइमरी अवैध स्कूलों में बच्चों के साथ हो रही गंभीर ज्यादतियों की ओर दिलाया। उन्होंने बताया कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। इसी क्रम में उन्होंने रायपुर के बिना मान्यता प्राप्त KPS Kids School में एक छात्रा को अगरबत्ती से जलाने जैसे सनसनीखेज और अमानवीय मामले को उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए, जिससे शासन में हड़कंप मच गया।
शिक्षा विभाग के दस्तावेज जलने पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान एक और बड़ा मुद्दा सामने आया।
विकास तिवारी ने रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हुए भीषण अग्निकांड का ज़िक्र करते हुए बताया कि इस आग में प्राइवेट स्कूलों की मान्यता, RTE में भर्ती, फीस नियामक से जुड़े, पिछले दो दशकों के अहम दस्तावेज जलकर खाक हो गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही न्यायालय ने इस मामले में संज्ञान लिया, शिक्षा विभाग में खलबली मच गई और अपने खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए षड्यंत्रपूर्वक पूरा कार्यालय जला दिया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि RTI के तहत प्राप्त कई दस्तावेजों का रिकॉर्ड उनके पास सुरक्षित है।
अब तय होगा—कौन बचेगा और कौन नपेगा
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह साफ है कि अब अवैध प्ले स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी और प्री-प्राइमरी बच्चों का शिक्षा का अधिकार कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतरेगा।

Niraj Tiwari
Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.
