जनजातीय भारत के सशक्तिकरण की नई इबारत : छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय संदेश

छत्तीसगढ़ ने जनजातीय भारत के सशक्तिकरण की दिशा में एक नई पहल की है, जो पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बन रहा है। यह पहल जनजातीय समुदायों के विकास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कोरबा/रायपुर (CGVARTA)। भारत के जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत, आत्मसम्मान और विकास को नई दिशा देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की प्राचीन संस्कृति, परंपराएं और जीवन-दर्शन भारत की आत्मा हैं, जिन्हें संरक्षित करना और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री साय कोरबा जिले के महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में सहभागिता कर रहे थे। उन्होंने गौरा-गौरी पूजन और बैगा-पुजारी समाज को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बैगा, पुजेरी, गुनिया और सिरहा जैसे पारंपरिक समाज आज भी जनजातीय संस्कृति के जीवंत संरक्षक हैं।
‘जनजातीय गौरव पथ’ : इतिहास और सम्मान का प्रतीक
मुख्यमंत्री साय ने आईटीआई चौक से बालको रोड तक के मार्ग को ‘जनजातीय गौरव पथ’ नाम देने और इसके प्रारंभिक बिंदु पर जनजातीय महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह पथ आने वाली पीढ़ियों को जनजातीय नायकों के संघर्ष, बलिदान और योगदान से परिचित कराएगा।
आदिवासी विकास का राष्ट्रीय विजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का गठन इसलिए किया था ताकि यहां के आदिवासी समाज को विकास का वास्तविक अधिकार मिल सके। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना तथा पीएम जनमन योजना की शुरुआत की।
उन्होंने बताया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के लिए 80 हजार करोड़ रुपये और पीएम जनमन योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के 6,691 गांव सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों—पहाड़ी कोरवा, बिरहोर सहित अन्य समुदायों—के लिए सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।
आदिवासी नेतृत्व, राष्ट्रीय गौरव
मुख्यमंत्री साय ने गर्व के साथ कहा कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समाज की बेटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आसीन हैं और छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी एक साधारण किसान परिवार से आने वाला आदिवासी समाज का बेटा है। यह सामाजिक समावेशन और लोकतंत्र की ताकत का जीवंत उदाहरण है।
संस्कृति, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण
जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा बैगा, गुनिया और सिरहा को प्रतिवर्ष 5,000 रुपये की सम्मान निधि दी जा रही है। साथ ही सरना स्थलों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर में स्थापित डिजिटल जनजातीय संग्रहालय में जनजातीय महापुरुषों की जीवनगाथाओं का आधुनिक तकनीक से सजीव चित्रण किया गया है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सके।
विकसित भारत से विकसित छत्तीसगढ़ तक
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेज़ी से विकसित राज्य बनने की ओर अग्रसर है। जिले के प्राचीन देवी-देवताओं के स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित कर स्थानीय रोजगार और पहचान को नई उड़ान दी जा रही है।
कार्यक्रम में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, महापौर संजू देवी राजपूत, पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।

Niraj Tiwari
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