बस्तर में बढ़ रही बारिश, सरगुजा में घट रही: 50 सालों में बदला मानसून का ट्रेंड

छत्तीसगढ़ में मानसून का ट्रेंड बदल रहा है, बस्तर में बारिश बढ़ रही है जबकि सरगुजा में घट रही है। जून की अनिश्चितता किसानों के लिए बड़ा जोखिम है।
छत्तीसगढ़ में सुकमा और दंतेवाड़ा के किसान बारिश ज्यादा होने से परेशान है। जबकि जशपुर और बलरामपुर के किसान बारिश कम होने से चिंता में है। रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के किसान हर साल आसमान देखकर यही सोचते हैं कि इस बार जून साथ देगा या नहीं। पिछले 40 से 50 साल के बारिश के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में मानसून अब पहले जैसा नहीं रहा।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उसकी चाल बदल रही है। बस्तर में बारिश बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि सरगुजा संभाग के कई जिलों में बारिश घट रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि खेती की शुरुआत तय करने वाला जून अब सबसे ज्यादा अनिश्चित महीना बनता जा रहा है।
यही वजह है कि कई बार किसान जल्दी बुआई कर देते हैं और बाद में बारिश रुक जाती है। दूसरी ओर कुछ सालों में मानसून देर से सक्रिय होता है और पूरा कृषि कैलेंडर पीछे खिसक जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में खेती की सबसे बड़ी चुनौती कुल बारिश नहीं, बल्कि जून की अनिश्चितता होगी।
आंकड़ों में एक और दिलचस्प पैटर्न दिखाई देता है। जून और जुलाई की बारिश में गिरावट के संकेत मिलते हैं, जबकि अगस्त और सितंबर में बढ़ोतरी का रुझान दिखाई देता है। सरल भाषा में समझें तो मानसून का वजन अब शुरुआती महीनों से हटकर बाद के महीनों की ओर जाता दिख रहा है।
पहले किसान जून और जुलाई के भरोसे खेती शुरू करते थे। अब कई बार अगस्त और सितंबर ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं। इस बदलाव का असर धान की फसल पर पड़ता है। शुरुआती समय में पर्याप्त पानी नहीं मिला तो पौध कमजोर होती है। वहीं कटाई के आसपास ज्यादा बारिश होने पर तैयार फसल को नुकसान हो सकता है।
बदलते मानसून का असर गांव और शहर दोनों पर पड़ता है। यदि बारिश का वितरण बिगड़ता है तो भूजल रिचार्ज प्रभावित होता है। इससे हैंडपंप, बोरवेल और छोटे जल स्रोत प्रभावित होते हैं। गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ सकती है।
इस साल मानसून सामान्य से बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है। इसके बीच राहत की बात यह है कि 9 जून तक राज्य के बड़े और मध्यम बांधों में 3335.83 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद है। कुल जलभराव 52.45% तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल इसी तारीख के 24.53% से दोगुने से भी ज्यादा है।

Niraj Tiwari
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