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        छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की नई उड़ान

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Feb 12, 2026, 5:41 PM
        छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की नई उड़ान
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        छत्तीसगढ़ ने वन संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ये नई पहलें राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगी, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित होगा।

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        रायपुर (CGVARTA)। छत्तीसगढ़ में वन संरक्षण, हरित आवरण विस्तार, वन्यजीव संवर्धन और वनवासियों की आजीविका सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। वन, सहकारिता एवं परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण के साथ-साथ सतत विकास और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

        वन आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि

        भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान की दिसंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष आवरण में लगभग 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 44 प्रतिशत भाग वन क्षेत्र है। अत्यंत सघन वनों में 348 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि वनों की गुणवत्ता और पारिस्थितिक संतुलन में सुधार का संकेत है।

        6 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण

        “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान के तहत वर्ष 2024 में 4 करोड़ 20 लाख से अधिक और वर्ष 2025 में 2 करोड़ 79 लाख से अधिक पौधों का रोपण एवं वितरण किया गया। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत निजी भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ भूमि पर 3 करोड़ 67 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

        435 देवगुड़ियों का निर्माण

        आदिवासी देव स्थलों के संरक्षण के तहत दो वर्षों में 435 देवगुड़ियों का निर्माण कराया गया, जिस पर 16.17 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं।

        वन विभाग में भर्ती और बाघ संरक्षण

        वन विभाग में दो वर्षों में तृतीय श्रेणी के 313 पदों पर भर्ती की गई तथा 150 आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति दी गई है। वनरक्षक के 1484 पदों की शारीरिक परीक्षा पूर्ण हो चुकी है।
        राज्य में बाघ संरक्षण को नई मजबूती मिली है। गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के गठन के बाद वर्ष 2022 में 17 रहे बाघों की संख्या बढ़कर अब 35 हो गई है।

        वनभैंसा और पहाड़ी मैना संरक्षण

        इन्द्रावती टाइगर रिजर्व में 14 से 17 वनभैंसे दर्ज किए गए हैं। राज्य पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण हेतु ‘मैना मित्र’ योजना से स्थानीय युवाओं को जोड़ा गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और अब 600 से 700 पहाड़ी मैना देखी जा रही हैं।

        बर्ड सफारी और पहला रामसर स्थल

        गिधवा-परसदा में बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर एवं बर्ड सफारी की शुरुआत की गई है, जहां 270 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। बिलासपुर का कोपरा जलाशय राज्य का पहला और देश का 96वां रामसर स्थल घोषित हुआ है, जिससे इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

        240 नैसर्गिक पर्यटन केंद्र

        प्रदेश में 240 नैसर्गिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 50 से अधिक स्वावलंबी बन चुके हैं। वनवासियों की सुविधा के लिए 96 रपटा-पुलिया का निर्माण कराया गया है।

        मानव-हाथी द्वंद पर नियंत्रण

        ‘गज संकेत’ ऐप के माध्यम से हाथियों की निगरानी की जा रही है और ग्रामीणों को समय पर सूचना दी जा रही है। राज्य में 90 हाथी मित्र दल गठित हैं तथा वर्तमान में 355 हाथी दर्ज किए गए हैं।

        औषधीय पौधों से महिला सशक्तिकरण

        औषधि पादप बोर्ड के माध्यम से विभिन्न जिलों में औषधीय पौधों का रोपण कर हजारों महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। पारंपरिक वैद्यों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

        वन विकास निगम की पहल

        राज्य वन विकास निगम द्वारा सतत वानिकी सिद्धांतों के तहत काष्ठ उत्पादन, वृक्षारोपण और अवैध अतिक्रमण हटाने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। काष्ठिय वनोपज की बिक्री ई-ऑक्शन से की जा रही है। वन अधिकार अधिनियम के तहत 1165 प्रकरणों में सड़क, विद्यालय, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य अधोसंरचना विकास के लिए वनभूमि उपयोग की स्वीकृति दी गई है।

        एशिया का सबसे बड़ा समुद्रीय जीवाश्म पार्क

        मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का मरीन फॉसिल पार्क एशिया का सबसे बड़ा समुद्रीय जीवाश्म पार्क है। हसदेव नदी के किनारे लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस स्थल पर 29 करोड़ वर्ष पुराने जीवाश्म मिले हैं। देश में ऐसे जीवाश्म केवल चार स्थानों पर पाए गए हैं।

        वन क्षेत्र में बढ़ता हरित आवरण, वन्यजीवों की बढ़ती संख्या और इको-टूरिज्म के विस्तार से छत्तीसगढ़ सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई पहचान बना रहा है।

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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