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        हाईकोर्ट ने फिर कसा शिकंजा: मुक्तिधामों की बदहाली पर चीफ सेक्रेटरी को मॉनिटरिंग का आदेश

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Dec 9, 2025, 11:54 AM
        हाईकोर्ट ने फिर कसा शिकंजा: मुक्तिधामों की बदहाली पर चीफ सेक्रेटरी को मॉनिटरिंग का आदेश
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        छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जिलों से मांगी रिपोर्ट, बिलासपुर निगम कमिश्नर को हलफनामा देने का निर्देश; अगली सुनवाई जनवरी में।

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        बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुक्तिधामों की बदहाली पर गंभीर रुख अपनाते हुए सभी जिलों के कलेक्टरों से मांगी गई फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट का संज्ञान लिया है। अदालत में रिपोर्ट पेश होने के बाद कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेशों के पालन की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब देने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में तय की गई है।

        सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मुक्तिधामों के रखरखाव के लिए विस्तृत दिशा–निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिनमें नियमित सफाई, ग्रीन फेंसिंग या बाउंड्री, शेड मरम्मत, बिजली की उपलब्धता, पानी, तथा पुरुष–महिला के लिए अलग शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने का प्रावधान है।

        सोमवार की सुनवाई में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि गरिमापूर्ण अंतिम संस्कार करना संविधान के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है। इसलिए सरकार और स्थानीय प्रशासन का दायित्व है कि हर मुक्तिधाम में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।

        दरअसल, 29 सितंबर को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा बिल्हा स्थित एक मुक्तिधाम पहुंचे थे, जहाँ अव्यवस्था, गंदगी और सुविधाओं के अभाव को देखकर उन्होंने नाराज़गी जताई थी। उसी अव्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका माना और राज्य सरकार एवं प्रशासन से जवाब तलब किया था।

        58% आरक्षण विवाद फिर पहुंचा हाईकोर्ट

        छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण लागू रखने के फैसले के खिलाफ कुछ अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दो अलग-अलग रोस्टर लागू होने से राज्य स्तरीय भर्तियों में पदों की संख्या सीधे प्रभावित हो रही है, जिससे वे असमंजस में हैं।

        हाईकोर्ट ने 19 सितंबर 2022 को 58% आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार को इस फैसले को जारी रखने के लिए उच्चतम न्यायालय से कोई स्टे आदेश नहीं मिला है।

        याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि 58% आरक्षण लागू करना उसके आदेश का उल्लंघन है, परंतु शीर्ष अदालत में मामला लंबित होने के कारण आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद करने की बात कही।

        मुक्तिधाम में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

        चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा 29 सितंबर को रहंगी गांव के मुक्तिधाम भी पहुंचे थे, जहाँ अंतिम संस्कार के दौरान उन्होंने गंदगी, टूटी व्यवस्था और पानी–शौचालय जैसी सुविधाओं के अभाव को गंभीर मुद्दा बताया। इसके बाद बिलासपुर कलेक्टर की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि रहंगी मुक्तिधाम में तत्काल सुधार कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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