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        भिलाई में सीमाकर वसूली पर बवाल: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, नोटिसों पर रोक की मांग

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Jan 19, 2026, 4:43 PM
        भिलाई में सीमाकर वसूली पर बवाल: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, नोटिसों पर रोक की मांग
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        भिलाई में सीमाकर वसूली को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने इस मामले में मुख्य सचिव को पत्र लिखकर नोटिसों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

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        भिलाई में सीमाकर वसूली पर बवाल: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, नोटिसों पर रोक की मांग
        भिलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने भिलाई नगर निगम द्वारा उद्योगों पर लगाए जा रहे सीमाकर/निर्यात कर (टर्मिनल टैक्स) को लेकर राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने इसे न केवल उद्योग विरोधी कदम बताया है, बल्कि इसे संविधान और जीएसटी व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ करार दिया है।
        प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने अपने पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और वित्त मंत्री ओपी चौधरी को भी भेजी है, ताकि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित निर्णय ले सके। उनका कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद भी नगर निगम द्वारा उद्योगों से सीमाकर वसूली करना कानूनन गलत है और इससे प्रदेश की औद्योगिक छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
        50–60 उद्योगों को भेजे गए हैं नोटिस
        पत्र में पाण्डेय ने उल्लेख किया है कि भिलाई नगर निगम ने अपने क्षेत्र में संचालित लगभग 50 से 60 लघु एवं मध्यम उद्योगों को सीमाकर वसूली के लिए नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस वर्ष 2017–18 से 2024–25 की अवधि के लिए हैं, जिनमें लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक की मांग की गई है।



        निगम ने इन नोटिसों में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 173 और मध्यप्रदेश नगर पालिका सीमा से निर्यातित वस्तुओं पर टर्मिनल टैक्स नियम, 1996 (नियम 4 और 7) का हवाला दिया है। हालांकि, पाण्डेय का कहना है कि ये प्रावधान अब जीएसटी लागू होने के बाद प्रभावहीन हो चुके हैं।
        जीएसटी के बाद नगर निगम का अधिकार खत्म
        पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई 2017 से पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हो चुका है। संविधान के 101वें संशोधन अधिनियम, 2016 के तहत केंद्र और राज्य सरकारों को ही वस्तुओं के उत्पादन, विक्रय, आपूर्ति और परिवहन पर कर लगाने का अधिकार है।
        उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 246 और 269 का हवाला देते हुए कहा कि इन प्रावधानों के अनुसार कराधान का अधिकार केवल केंद्र और राज्य को है, नगर निकायों को नहीं। ऐसे में नगर निगम द्वारा सीमाकर या टर्मिनल टैक्स वसूलना अब कानूनी रूप से “इनऑपरेटिव” यानी अप्रभावी हो चुका है।
        संविधान के अनुच्छेद 265 का उल्लंघन
        पाण्डेय ने अपने पत्र में यह भी कहा कि बिना वैध कानूनी आधार के कर वसूली संविधान के अनुच्छेद 265 का सीधा उल्लंघन है। इस अनुच्छेद के तहत कोई भी कर तभी लगाया जा सकता है, जब उसके लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद हो।
        उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जीएसटी लागू होने के बाद नगर निकायों को क्षतिपूर्ति के रूप में जीएसटी का हिस्सा दिया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 243X के तहत नगर निकायों के वित्तीय अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि वे विकास कार्यों के लिए निर्भर रहें, न कि अवैध करों पर।
        उद्योगों पर पड़ रहा है नकारात्मक असर
        प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि सीमाकर की वसूली से उद्योगों का उत्पीड़न हो रहा है। निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है और रोजगार सृजन पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो छत्तीसगढ़ की औद्योगिक छवि को गंभीर नुकसान हो सकता है।
        तत्काल जांच और वसूली पर रोक की मांग
        पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से मांग की है कि नगर निगम भिलाई द्वारा जारी किए गए सभी नोटिसों की तत्काल जांच और विधिक समीक्षा कराई जाए। साथ ही नगरीय प्रशासन विभाग से स्पष्ट शासनादेश जारी किया जाए, जिससे सभी नगर निगमों को ऐसे कर लगाने से रोका जा सके।
        उन्होंने यह भी मांग की है कि अंतिम निर्णय आने तक निगम द्वारा किसी भी प्रकार की वसूली न की जाए और उद्योगों व फैक्ट्रियों पर सीलिंग, जुर्माना या दंडात्मक कार्रवाई न हो।

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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