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        आदिवासी पति और अनुसूचित जाति की पत्नी के तलाक का मामला: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Mar 8, 2026, 4:39 PM
        आदिवासी पति और अनुसूचित जाति की पत्नी के तलाक का मामला: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
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        हाई कोर्ट ने आदिवासी पति और अनुसूचित जाति की पत्नी के तलाक के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि आदिवासी भी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के दायरे में आते हैं।

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        हाई कोर्ट ने आदिवासी पति और अनुसूचित जाति की पत्नी के तलाक के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि आदिवासी भी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के दायरे में आते हैं। यह फैसला एक महत्वपूर्ण मामले में आया है, जिसमें एक आदिवासी पति और अनुसूचित जाति की पत्नी के बीच तलाक की कार्यवाही चल रही थी।

        इस मामले में फैमिली कोर्ट ने पहले यह कहा था कि आदिवासी समुदाय हिंदू विवाह अधिनियम के दायरे में नहीं आता है, लेकिन हाई कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 सभी हिंदू समुदायों पर लागू होता है, जिसमें आदिवासी समुदाय भी शामिल है।

        यह फैसला आदिवासी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनके विवाह और तलाक से संबंधित मामलों में स्पष्टता आएगी। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत आदिवासी समुदाय को भी अब विवाह और तलाक से संबंधित अधिकार और सुरक्षा प्राप्त होगी।

        कोर्ट के इस फैसले का आदिवासी समुदाय और अनुसूचित जाति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। यह फैसला सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

        हाई कोर्ट के इस फैसले पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला आदिवासी समुदाय के लिए एक बड़ी जीत है। इससे आदिवासी समुदाय को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।

        इस फैसले के बाद आदिवासी समुदाय और अनुसूचित जाति के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद है। यह फैसला सामाजिक सौहार्द और एकता को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकता है।

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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