web-logo
  • छत्तीसगढ़

    |

    राष्ट्रीय |
    देश – विदेश |
    खेल |
    मनोरंजन |
    धर्म – संस्कृति |
    लाइफस्टाइल |
  • Stories
  • E-papers
      • छत्तीसगढ़

        भारतीय संस्कृति, आरोग्य, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश

        CGVARTACGVARTA
        Nov 6, 2026, 12:23 PM
        भारतीय संस्कृति, आरोग्य, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश
        Share :

        दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में गौमाता, प्रकृति, आरोग्य और समृद्धि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का 5 दिवसीय महापर्व है। इन 5 दिनों में गौमाता का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व देखने को मिलता है।

        14px16px18px20px22px24px
        Speed:

        दीपावली के 5 पर्व और गौमाता का महत्व

        रायपुर (CGVARTA)। दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में गौमाता, प्रकृति, आरोग्य और समृद्धि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का 5 दिवसीय महापर्व है। इन 5 दिनों में गौमाता का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व देखने को मिलता है।

        1. धनतेरस – आरोग्य और गोमूत्र का महत्व
        भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस धनतेरस पर आयुर्वेद और आरोग्य का स्मरण किया जाता है। गोमूत्र को भारतीय पारंपरिक चिकित्सा एवं पंचगव्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसका उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक परंपराओं में भी मिलता है।

        2. रूप चौदस एवं नरक चतुर्दशी – प्रकृति और शुद्धता का संदेश
        इस दिन शरीर की स्वच्छता, सौंदर्य और सकारात्मकता का विशेष महत्व है। गौमाता का दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से निर्मित पंचगव्य भारतीय परंपरा में पवित्रता एवं प्राकृतिक जीवनशैली का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं में गौमाता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है।

        3. दीपावली – गोबर के दीपकों से पर्यावरण संरक्षण
        दीपावली पर गाय के गोबर से बने वैदिक दीपक जलाना एक सुंदर भारतीय परंपरा को नया स्वरूप देने का प्रयास है। ये स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित होते हैं, प्लास्टिक एवं अन्य कृत्रिम सजावटी वस्तुओं के विकल्प बन सकते हैं और उपयोग के बाद जैविक रूप से मिट्टी में मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार तथा गौशालाओं को गोबर के सदुपयोग का अवसर मिलता है।

        4. गोवर्धन पूजा – गौमाता और गोबर का सम्मान
        इस दिन गौमाता की पूजा, गोबर से गोवर्धन पर्वत का निर्माण और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। गोबर जैविक खाद, भूमि की उर्वरता और प्राकृतिक खेती का महत्वपूर्ण आधार है। यह भारतीय कृषि संस्कृति में गौमाता के योगदान का प्रतीक है।

        5. भाई दूज – स्नेह, संस्कार और गौमाता का आशीर्वाद
        भाई दूज पर बहनें भाई का तिलक कर उसकी सुख-समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना करती हैं। कई पारंपरिक क्षेत्रों में गोबर से आंगन लीपने, चौक बनाने और दीप प्रज्वलित करने की परंपरा भी रही है। यह स्वच्छता, पारिवारिक प्रेम और लोकसंस्कृति का सुंदर संगम है।

        गौमाता के प्रत्येक अंश में उपयोगिता का संदेश
        गाय का दूध पोषण का स्रोत, दही और घी भारतीय आहार एवं परंपरा का हिस्सा, गोबर जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधन तथा गोमूत्र पारंपरिक पंचगव्य का महत्वपूर्ण घटक है। गौमाता का संरक्षण केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और जीवदया से भी जुड़ा हुआ है।

        CGVARTA
        author

        CGVARTA

        Committed to truthful reporting and ethical journalism.

        nextArticle