web-logo
  • छत्तीसगढ़

    |

    राष्ट्रीय |
    देश – विदेश |
    खेल |
    मनोरंजन |
    धर्म – संस्कृति |
    लाइफस्टाइल |
  • Stories
  • E-papers
      • breaking

        सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राज्यपाल बिल रोक नहीं सकते, फेडरल स्ट्रक्चर पर क्या कहा कोर्ट ने?

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Nov 20, 2025, 5:52 PM
        सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राज्यपाल बिल रोक नहीं सकते, फेडरल स्ट्रक्चर पर क्या कहा कोर्ट ने?
        Share :
        14px16px18px20px22px24px
        Speed:

        कोर्ट ने स्पष्ट किया—गवर्नर के पास केवल तीन विकल्प: मंजूरी, पुनर्विचार के लिए वापसी या राष्ट्रपति के पास भेजना। बिल अनिश्चितकाल तक लंबित रखना संविधान के खिलाफ।


        by - Thaneshwar sahu 

        नई दिल्ली। देश के संवैधानिक ढांचे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कर दिया कि राज्यपाल विधानसभा से पारित बिलों को रोक नहीं सकते। साथ ही, गवर्नरों के विवेकाधिकार की सीमाएं भी स्पष्ट कर दीं।

        राज्यपाल के पास सिर्फ 3 विकल्प—कोर्ट का स्पष्ट आदेश

        सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी राज्य के गवर्नर के पास बिल पर केवल तीन विकल्प होते हैं—

        1. मंजूरी देना,

        2. दोबारा विचार के लिए विधानसभा को भेजना, या

        3. राष्ट्रपति के पास भेजना।

        कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यपाल किसी बिल को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में रुकावट माना जाएगा।

        'समय सीमा तय नहीं की जा सकती, पर अत्यधिक देरी पर कोर्ट दखल देगा'

        फैसले के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि गवर्नर के लिए बिल मंजूरी की कोई कठोर समय सीमा नहीं तय की जा सकती। यह संविधान में शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत का उल्लंघन होगा।
        लेकिन अगर अनुचित देरी होती है, तो सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।

        तमिलनाडु केस से उठा विवाद

        यह पूरा मामला तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच हुए विवाद से शुरू हुआ था। राज्यपाल द्वारा कई बिलों को रोककर रखे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 8 अप्रैल को स्पष्ट किया था कि गवर्नर के पास कोई वीटो पावर नहीं है।

        कोर्ट ने पहले यह भी कहा था कि राष्ट्रपति की ओर भेजे गए बिल पर तीन महीने के अंदर फैसला आवश्यक है। राष्ट्रपति ने इस टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा और 14 सवाल पूछे थे।

        संघवाद पर खतरा बताया

        पांच जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि:

        • बिलों को एकतरफा तरीके से रोकना संघवाद (Federalism) का उल्लंघन है।

        • अगर गवर्नर अनुच्छेद 200 की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना बिलों को रोके रखते हैं, तो यह संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ माना जाएगा।

        Niraj Tiwari
        author

        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

        Tag :
        थाईलैंड ट्रेन हादसापैसेंजर ट्रेन दुर्घटनाक्रेन गिरने की घटनाThailand Train AccidentCrane Falls on TrainRailway Disaster News
        nextArticle