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        बस्तर विवाद: सोनी सोढ़ी का दावा — "नक्सलवाद कभी खत्म नहीं", गृहमंत्री बोले — 'भ्रम फैला रही हैं'

        Niraj TiwariNiraj Tiwari
        Oct 31, 2025, 7:03 PM
        बस्तर विवाद: सोनी सोढ़ी का दावा — "नक्सलवाद कभी खत्म नहीं", गृहमंत्री बोले — 'भ्रम फैला रही हैं'
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        तेलंगाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी ने आदिवासियों के खिलाफ कथित फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया; राज्य व केंद्र सरकार ने उनके बयानों को खंडित किया।

        रायपुर.
         बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी ने तेलंगाना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि नक्सलवाद देश से पूरी तरह गायब नहीं होगा और आदिवासियों के कई मामलों में फर्जी एनकाउंटर्स हो रहे हैं। सोनी ने विशेष तौर पर CCM रामचंद्र रेड्डी, कोसा दादा, तथा हाल में सरेंडर करने वाले नक्सली नेताओं भूपति और रुपेश के मामलों का हवाला देते हुए आरोप लगाए कि आदिवासी जनता से राय लिए बिना ही कई अहम निर्णय लिए जा रहे हैं।

        सोनी ने कहा कि बस्तर में हुए संघर्ष को केवल 'आतंकवाद' की श्रेणी में डालना सही नहीं है — उनके अनुसार वहां की लड़ाई अक्सर जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और कॉरपोरेट विस्तार के खिलाफ होती है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार स्थानीय समुदायों की आवाज़ को नजरअंदाज कर सीधे राजनीतिक और सुरक्षा अधिकारियों के बीच समझौते हो जाते हैं, जिससे स्थानिक समुदायों को नुकसान पहुँचता है।

        वहीं, राज्य और केंद्र स्तर पर सोनी के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया आई। केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि और छत्तीसगढ़ के राज्य गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ये बयान 'भ्रम' फैला रहे हैं और सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हथियार उठाकर हिंसा करने को आदिवासियों के हक़ के लिए जस्टिफाई किया जा सकता है। मंत्री ने यह भी कहा कि संविधान और कानून का उद्देश्य पूरे देश में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

        नीचे दोनों पक्षों के मुख्य बिंदु संक्षेप में दिए जा रहे हैं:

        • सोनी सोढ़ी के तर्क:

          • नक्सलवाद के सामाजिक-आर्थिक कारण हैं — विशेषकर भूमि, जंगल और संसाधनों पर झगड़े।

          • कुछ मामलों में आदिवासियों के खिलाफ कथित फर्जी एनकाउंटर्स की रिपोर्टें आई हैं।

          • अधिकारियों और निवासियों के बीच संवाद जरूरी है; सरेंडर से पहले स्थानीय जनभागीदारी द्वार खोलना चाहिए था।

        • सरकार का रुख (विजय शर्मा):

          • ऐसे बयान सुरक्षा बलों के समर्पण तथा कानूनी कार्रवाई पर संदेह पैदा करते हैं।

          • हिंसा और हथियारबंद गतिविधियों को किसी भी सूरत में सही ठहराया नहीं जा सकता।

          • राज्य-केंद्र का उद्देश्य संविधान और कानून के तहत सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करना है।

         

        Niraj Tiwari
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        Niraj Tiwari

        Independent journalist with 5 years of hands-on experience covering ground reports, interviews, and investigative stories. Committed to truthful reporting and ethical journalism.

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