छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: पति को ‘पालतू चूहा’ कहना मानसिक क्रूरता, तलाक बरकरार

पति-पत्नी विवाद में हाईकोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज की, तलाक और गुजारा भत्ता आदेशित
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति को ‘पालतू चूहा’ कहने और माता-पिता से अलग रहने की ज़िद को मानसिक क्रूरता मानते हुए तलाक के फैसले को बरकरार रखा।
2009 में शादी करने वाले दंपती का रिश्ता समय के साथ खट्टा हो गया। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी ने उनके माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किया और उनसे अलग रहने की जिद की। इसके विरोध में पत्नी ने आक्रामक व्यवहार अपनाया और उसे अपमानजनक शब्द कहकर तंग किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था में पति को माता-पिता से अलग करने की कोशिश मानसिक क्रूरता के दायरे में आती है। अदालत ने बेटे के पालन-पोषण के लिए हर महीने 6,000 रुपये गुजारा भत्ता और पत्नी को 5 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान पत्नी द्वारा भेजे गए टेक्स्ट मैसेज को भी सबूत माना गया। इसके अलावा, पत्नी लाइब्रेरियन और पति बैंक में कर्मचारी हैं।
फैसला जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने सुनाया।

Niraj Tiwari
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