देश का सबसे बड़ा नक्सल सरेंडर: भूपति और 61 साथियों के आज आत्मसमर्पण की तैयारी, बस्तर में भाजपा नेता की हत्या से हलचल

गढ़चिरौली में नक्सल नेता सोनू उर्फ भूपति के समर्पण से संगठन में मची खलबली — उधर बीजापुर में नक्सलियों ने भाजपा नेता की बेरहमी से हत्या कर दी।
बीजापुर/गढ़चिरौली। देश में नक्सल इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी खबर सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, कुख्यात नक्सल नेता सोनू उर्फ भूपति मंगलवार, 14 अक्टूबर को गढ़चिरौली में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण करने जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, संघर्षविराम को लेकर सोनू द्वारा जारी प्रेस नोट के बाद से नक्सली संगठन में भारी हलचल मची हुई थी।
सूत्रों ने बताया कि संगठन ने PLGA दस्तों को भूपति और उसके साथियों से हथियार छीनने तक के निर्देश जारी कर दिए थे।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि भूपति की जान को उसके ही साथियों से खतरा है।
कौन है नक्सल नेता भूपति?
भूपति का असली नाम मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ विवेक उर्फ लक्षन्ना उर्फ रूसी है।
करीब 69 वर्षीय भूपति तेलंगाना के करीमनगर जिले के पेद्दापल्ली गांव का रहने वाला ब्राह्मण समुदाय से है।
वह भाकपा (माओवादी) संगठन का पोलित ब्यूरो सदस्य, सेंट्रल कमेटी सदस्य, सीआरबी सचिव और प्रवक्ता रह चुका है।
उसके पास AK-47 हथियार होता है और उस पर 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है।
बस्तर में भाजपा नेता की हत्या से सियासी हलचल
इधर, ठीक उसी दिन छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने भाजपा नेता पूनेम सत्यम की हत्या कर दी।
नक्सलियों ने उन पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाते हुए बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
घटनास्थल से नक्सलियों द्वारा फेंका गया पर्चा भी बरामद हुआ, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पर्चे में लिखा गया —
“ब्राह्मणीय हिंदुत्ववादी भाजपा, आरएसएस, मोदी और विष्णुदेव साय सरकार ने मार्च 2026 तक माओवादी पार्टी के खात्मे का लक्ष्य रखा है। इसलिए हम भाजपा संगठन और पुलिस मुखबिरों को समाप्त करने की कार्रवाई कर रहे हैं।”
नक्सलियों ने यह भी दावा किया कि पूनेम सत्यम की मौत की जिम्मेदारी “ब्राह्मणीय फासीवादी सरकार” की है, न कि एरिया कमेटी की।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की नजरें टिकीं
गढ़चिरौली में भूपति और 61 साथियों के आत्मसमर्पण की खबर से सुरक्षा एजेंसियों में खुफिया हलचल बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि यदि यह आत्मसमर्पण होता है, तो यह देश के नक्सल इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जाएगी।

Niraj Tiwari
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